कांग्रेस ने 1993 में किए गए अयोध्या भूमि अधिग्रहण को याद किया


नई दिल्ली,कांग्रेस ने अयोध्या भूमि विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए याद किया कि उन्हीं की पार्टी की सरकार ने 1993 में मंदिर के लिए भूमि का अधिग्रहण किया था। लेकिन पार्टी ने कहा कि यह श्रेय लेने या न लेने का कोई मामला नहीं है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, "तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अयोध्या अधिनियम के तहत भूमि अधिग्रहण किया था।"

सुरजेवाला ने सवाल किया कि क्या पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी को विवादित स्थल के ताले खुलवाने का श्रेय नहीं दिया जाना चाहिए? हालांकि उन्होंने कहा, "अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला किसी व्यक्ति, लोगों के समूह, समुदायों या राजनीतिक दलों को श्रेय लेने या न लेने का मामला नहीं हो सकता।"

पार्टी ने कहा कि राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में ही पहली फरवरी, 1986 को विवादित स्थल का ताला खोला गया था और वहां नियमित प्रार्थना की अनुमति दी गई थी। उसके पहले तक वह स्थान बंद था, और एक पुजारी को साल में एक बार पूजा की अनुमति थी।

सुरजेवाला ने भगवान राम पर राजनीति करने के लिए भाजपा की आलोचना भी की। उन्होंने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने न सिर्फ मंदिर निर्माण के दरवाजे खोल दिए हैं, बल्कि उन लोगों के लिए दरवाजे बंद भी कर दिए हैं, जो लोग धर्म के नाम पर राजनीति करते रहे हैं।"

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या पर फैसला दिया है। कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए हमें सद्भाव के साथ रहना चाहिए। यह क्षण सभी भारतवासियों के लिए प्यार, विश्वास और भाईचारे का है।"

इसके पहले कांग्रेस कार्यकारिणी ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है। हम संबंधित सभी पक्षों और सभी समुदायों से अपील करते हैं कि वे हमारे संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और भाईचारे की भावना से बंधे रहें और शांति एवं सौहाद्र्र बनाए रखें।"

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