मोदी ने करतारपुर जाने वाले पहले जत्थे को किया रवाना


डेरा बाबा नानक (पंजाब), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की भावनाओं का आदर करने के लिए शनिवार को पाकिस्तानी समकक्ष इमरान खान का आभार जताया और करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद पाकिस्तान के दरबार साहिब जाने वाले तीर्थयात्रियों के पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सात दशकों के दरम्यान अपनी तरह का यह पहला अवसर था, जब मोदी ने दरबार साहिब की यात्रा के लिए तैयार 500 तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। दरबार साहिब को ही करतारपुर साहिब के नाम से पुकारते हैं। यह पाकिस्तान के पंजाब के नारोवाल जिले में स्थित है।

मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह से पहले इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के उद्घाटन से पहले कहा, "गुरुद्वारा दरबार साहिब की यात्रा करना अब आसान होगा।"

यह कॉरिडोर पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे से पाकिस्तान की सीमा में स्थित करतारपुर साहब गुरुद्वारा को जोड़ता है।

यह कार्यक्रम पहले सिख गुरु नानक देव की 550वीं जयंती से पहले आयोजित हुआ है। गुरु नानक देव की जयंती 12 नवंबर को है।

उन्होंने कहा, "मैं कॉरिडोर के निर्माण से जुड़े सभी लोगों का आभार प्रकट करता हूं।"

उन्होंने यह भी कहा कि वह भारत की भावनाओं को समझने, उसका आदर करने व तय समय सीमा के तहत करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण के लिए इमरान खान का भी आभार प्रकट करते हैं।

भगवा रंग की पगड़ी पहने मोदी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि कॉरिडोर व इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट हर रोज हजारों श्रद्धालुओं को सेवाएं देगा।

मोदी ने कहा, "आज कॉरिडोर का उद्घाटन करना मेरे लिए सम्मान की बात है। गुरु नानक देव की शिक्षाओं का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हो रहा है, जिससे की अगली पीढ़ी भी उससे समृद्ध हो। हमें गुरु नानक देव के उपदेशों को आत्मसात करना चाहिए, जो अभी भी प्रासंगिक है।"

एसजीपीसी ने मोदी को कौमी सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "गुरु नानक देव से गुरु गोबिंद सिंह तक हर सिख गुरु ने देश की एकता, रक्षा व सुरक्षा के लिए प्रयास किया। इस परंपरा को सिखों द्वारा स्वतंत्रता संघर्ष और उसके बाद देश की रक्षा के लिए आगे बढ़ाया गया है।"

उन्होंने गुरु नानक देव के संदेश के प्रसार में सहायता के लिए यूनेस्को का भी आभार जताया।

मोदी ने गुरु नानक देव के सम्मान में एक स्मारक सिक्का व डाक टिकट भी जारी किया।

अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की अगुवाई में तीर्थयात्रियों के पहले समूह 'जत्था' (प्रतिनिधिमंडल) को झंडी दिखाने से पहले मोदी ने पंजाब के राज्यपाल वी.पी.सिह बदनौर व राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ के साथ 'लंगर' में भाग लिया।

तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह , पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल व नवजोत सिंह सिद्धू भी शामिल थे।

मोदी ने मनमोहन सिंह से बातचीत की, सिंह के साथ उनकी पत्नी गुरशरण कौर भी थीं।

एजीपीसी के सदस्य और 117 विधायक व पंजाब के सांसद भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

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