गर्भनिरोधक गोलियों के ये साइड इफेक्ट जानकर आप ज़िन्दगी में नहीं करेंगे इस्तेमाल


दुनियाभर में बड़ी संख्या में महिलाएं अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने के लिए ऑरल बर्थ कंट्रोल पिल्स यानी गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं। इतना ही नहीं, कई बार डॉक्टर भी मेन्स्ट्रुएशन से जुड़ी समस्याएं, सिस्ट से जुड़ी प्रॉबल्म, पीरियड्स में हद से ज्यादा होने वाला दर्द और पीसीओडी यानी पॉलिसिस्टक ओवरी डिजीज जैसी बीमारियों में भी कॉन्ट्रसेप्टिव पिल्स को प्रिस्क्राइब करते हैं। भले ही अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने में ये गोलियां मददगार हों लेकिन इनके कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते हैं।


कॉन्ट्रसेप्टिव पिल्स यानी गर्भनिरोधक गोलियां, शरीर में हॉर्मोन्स को इन्ट्रोड्यूस करती हैं जिससे शरीर में पहले से मौजूद हॉर्मोन्स का डिस्टर्ब होना लाजिमी है। इस वजह से मेन्स्ट्रुअल साइकल अनियमित हो जाता है और पीरियड्स भी डीले हो जाते हैं। कुछ महिलाओं को तो गर्भनिरोधक गोलियां लेने के बाद उल्टी आना, चक्कर आना, सिर घूमना जैसी दिक्कतें भी अनुभव होती हैं। साथ ही वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स और ब्रेस्ट में टेंडरनेस आने की भी दिक्कत आ सकती है।


बर्थ कंट्रोल पिल्स के सिर्फ इतने ही साइड इफेक्ट्स नहीं है। 105वें रेडियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका की वार्षिक मीटिंग में हाल ही में हुई एक स्टडी के नतीजों को रखा गया जिसमें गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं के ब्रेन स्कैन की तुलना गोली न लेने वाली महिलाओं के ब्रेन स्कैन से की गई। इस स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने 50 महिलाओं का ब्रेन स्कैन जिसमें से 21 महिलाएं नियमित रूप से गोलियों का सेवन कर रहीं थीं।


वैज्ञानिकों ने पाया कि वैसी महिलाएं जो कॉन्ट्रसेप्टिव पिल्स यानी गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन कर रही थीं उनके दिमाग के हाइपोथैलमस वॉल्यूम में काफी अंतर देखा गया उन महिलाओं की तुलना में जो गोली नहीं ले रहीं थीं। दरअसल, हाइपोथैलमस ब्रेन का वह हिस्सा है जिससे सेक्स ड्राइव कंट्रोल होता है। साथ में स्लीप साइकल, मूड स्विंग्स और ऐप्टाइट यानी भूख भी। स्टडी के लीड ऑथर और रेडियोलॉजी के प्रफेसर डॉ लिप्टन ने कहा, 'शुरुआती स्टडी तो यह दिखाती है कि गर्भनिरोधक गोलियां ब्रेन फंक्शन पर असर डालती हैं लेकिन इसके लिए और ज्यादा इन्वेस्टिगेशन करने की जरूरत है।'

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