तीन लोगों को फाँसी की सजा दे रहे थे…


मोदी भक्त:-

कुछ तो इतने बड़े मोदी भक्त है कि, पूछो मत…

ट्रेन में मैंने एक आदमी से सिर्फ इतना ही कह दिया कि –

 “इस साल बारिश बहोत है…”

भाई तो भड़क गया…

और बोला – “क्युं… काँग्रेस के समय नहीं होती थी क्या?”

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तीन लोगों को फाँसी की सजा दे रहे थे…

पहले को जैसे ही लटकाया तो फंदा खुल गया…

और वो नीचे पानी में गिर गया… और तैरकर बाहर आ गया..

दुसरे को भी जैसे ही लटकाया तो उसका भी फंदा खुल गया… और वो भी तैरकर बाहर आ गया…

जल्लाद से सांता जोर से बोला – ओये बे साले, फँदा ठिक से टाईट करना…

मुझे तैरना नहीं आता…

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